टुकड़े हर चीज़ के हो जाते हैं...पर कुछ है जो उनको इक्कठा कर के रखता है...कोशिश है उन टुकड़ों को समेटने की ...जितने भी समेत पाएं और उस चीज़ की तलाश जारी रखने की जो इन्हें एक साथ रखती है ....कुछ बेरंग टुकड़े हैं ...रंगीन हिस्सों से अलग ...कुछ ख़ुशी के टुकड़े हैं घमों के टुकड़ों से अलग ..पर हैं सब इधर उधर ही...जब मिल जाते हैं ये सब तो ज़िन्दगी बनते हैं...बातें होंगी ...गुफ्तगू होगी इन्ही टुकड़ों क बारें में ...आज के लिए इतना ही ...जाते जाते बस एक बात ..टुकड़ों को इक्कठा करिए..... उन्हें सहेजिये, जो अच्छे हैं.... आपकी पसंद के हैं...और बातें हो इन्ही क बारें में ....ज़िन्दगी के बारें में...
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